by: Suraj Pandey
if you are good enough you’re old enough… खेलों की दुनिया में इस वाक्य का अपना ही महत्व है. लब्बोलुआब पर जाएं तो कहता है कि अगर आप में दम है, तो उम्र मायने नहीं रखती. और इसे सच साबित किया एक 12 साल के लड़के ने. साल था 2024, महीना जनवरी. cricinfo ने बिहार बनाम मुंबई रणजी ट्रॉफी मैच की एक रिपोर्ट छापी. इस रिपोर्ट के एक कोने में लिखा था- There was also a landmark when Bihar handed a first-class debut to Vaibhav Suryavanshi, aged just 12 years and 284 days. इस बात का ज़िक्र ख़बर की हेडिंग में भी था. लेकिन उस वक्त किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया.
लेता भी कैसे- ई बिहार है बबुआ. इहां कुछ भी हो सकता है. लेकिन वक्त बदला और ये 12 साल का लड़का 15 की उम्र पूरी करने से पहले भारतीय क्रिकेट का अगला बड़ा नाम बन गया. Vaibhav Suryavanshi नाम के इस लड़के ने जता दिया कि इसमें बहुत दम है और ये किसी के रोके ना रुकेगा. IPL के बाद की उनकी यात्रा आप सभी ने देखी, लेकिन इससे पहले वैभव क्या थे. कहां से शुरू हुई उनकी यात्रा और उन्होंने इस यात्रा में क्या कुछ देखा, चलिए आपको बताते हैं. लेकिन आगे बढ़ने से पहले आप इस वीडियो को लाइक कर लें, चैनल को सब्सक्राइब भी करते चलें जिससे ऐसे वीडियोज़ आपको खुद ब खुद मिल जाएं.
Vaibhav Suryavanshi ने बदल दी तकदीर

भारत का पूर्वी क्षेत्र, यहां मुख्यतः चार राज्य आते हैं. बंगाल, झारखंड, ओडिशा और बिहार. इन राज्यों में बिहार ही एक ऐसा राज्य है जहां खेल-कूद का कोई नामलेवा भी नहीं है. सालों तक यहां के क्रिकेटर्स अलग-अलग राज्यों से खेलते रहे. कोई बंगाल गया तो कोई झारखंड. क्रिकेट में करियर बनाना है तो बिहार छोड़ना ही पड़ेगा. ऐसी बातें बहुत आम थीं. लेकिन साल 2024 ने सब बदल दिया. इस साल की शुरुआत में ही वैभव का डेब्यू हुआ और फिर इस बंदे ने ना सिर्फ अपनी बल्कि बिहार क्रिकेट की कहानी भी फिर से लिखनी शुरू कर दी. वैभव ने साल 2024 खत्म होने से पहले ही IPL कॉन्ट्रैक्ट हासिल कर लिया.
राजस्थान रॉयल्स की टीम ने वैभव पर सबसे ज्यादा 1.10 करोड़ की बोली लगाई. वैभव बहुत कम उम्र में करोड़पति बन गए. लेकिन संशय तो तब भी था. सवाल थे कि राजस्थान वैभव को मौका देगी भी? इतनी सी उम्र में IPL जैसे हाई प्रेशर वाले टूर्नामेंट में कोई टीम एक बच्चे को उतारने का रिस्क क्यों लेगी. लोग सही भी साबित हो जाते. लेकिन तभी राजस्थान के कप्तान संजू सैमसन को चोट लग गई. वैभव को मौका मिल ही गया
. पहला मैच, इम्पैक्ट सब के रूप में आए. सामने शार्दुल ठाकुर जैसा अनुभवी बॉलर. पहली गेंद, लेंथ बॉल… और ये उड़ गई हवा में. 6 रन के लिए. 14 साल और 23 दिन का बच्चा. IPL में पहला स्कोरिंग शॉट- छक्का.
माहौल बन गया. बातें होने लगीं. चर्चा फैल गई. लोग बुदबुदाने लगे. नाम गुनगुनाने लगे, लेकिन वैभव का प्लान अलग था. उसने मन में कहा- रुको जरा, सबर करो. और सबर का फल मिला तीसरे मैच में. सिर्फ 35 गेंदों में शतक. गुजरात टाइटंस के बॉलर रो दिए. इतने छक्के और इतने चौके कि माहौल ही बन गया. अब वैभव IPL का सबसे युवा शतकवीर था. साथ ही उसके नाम सबसे कम गेंदों में शतक जमाने का भारतीय रिकॉर्ड भी हो गया. वैभव से कम गेंदों में सिर्फ क्रिस गेल ही IPL Century लगा पाए हैं. इस शतक ने सूर्यवंशी का वैभव पूरी दुनिया में फैला दिया.
और इस ख़बर से सबसे ज्यादा खुशी मिली संजीव सूर्यवंशी को. संजीव, जिन्होंने चार साल की उम्र में बेटे का टैलेंट पहचान लिया. खेत बेचा, नींद छोड़ी. बेटे को लेकर दर-दर भटके. सूर्योदय से पहले संजीव उठ जाते. बेटे को जगाते. टिफिन पैक करते और निकल पड़ते सौ किलोमीटर की यात्रा पर. जो खत्म होती पटना. समस्तीपुर में इतनी सुविधाएं नहीं थीं कि वैभव टेनिस बॉल की क्रिकेट से आगे जा पाए. इसलिए पिता ने ये फैसला किया कि खेत बेचकर, नींद त्यागकर ही सही लेकिन बेटे को पटना में ट्रेनिंग दिलानी है. वैभव के लिए पिता के साथ माता ने भी जान लगा दी.
मुंह अंधेरे उठना, खाना बनाकर पति और बेटे को भेजना. और फिर अकेले पूरा घर संभालना. क्योंकि ये दोनों तो अब अंधेरा होने पर ही लौटेंगे. ये लौटते तो इतने थके होते कि दुनिया में क्या चल रहा है, कुछ पता ही नहीं. ऐसे में मां ने अकेले घर को चलाया. पूरी ताकत लगा दी जिससे संजीव और वैभव अपने लक्ष्य पर फ़ोकस कर सकें. फोकस बढ़ा, नाम चढ़ा. पूरा बिहार एक बच्चे का फ़ैन होता गया. पूरे बिहार में कहीं भी क्रिकेट टूर्नामेंट हो तो मुख्य आकर्षण वैभव ही होते. टूर्नामेंट कराने वालों में होड़ रहती थी कि कैसे वैभव को अपने यहां बुला पाएं.
Vaibhav Suryavanshi जाते और तूफान मचा देते. लेकिन लक्ष्य अभी दूर था. संजीव सूर्यवंशी खुद जो नहीं कर पाए, वो काम बेटे को करना था. और ये काम इस तरीके से तो नहीं हो पाता. फिर आया कहानी का नेक्स्ट लेवल. प्रैक्टिस के घंटे बढ़ने लगे. बच्चा अब एक दिन में सौ-सौ ओवर बैटिंग करने लगा. बैटिंग के अलावा कुछ और नहीं करना. दिन में 600 गेंदें तक खेल लेनी. वो भी सीनियर्स की. क्योंकि अपनी उम्र वाले तो आसान शिकार थे ना. सीनियर्स के साथ नेट्स में बैटिंग और फिर जहां मौका मिले वहीं मैच प्रैक्टिस.

मेहनत रंग लाई. बिहार क्रिकेट असोसिएशन ने नोटिस किया. लड़का अब लोकल के साथ बिहार के लिए भी खेलने लगा. रणधीर वर्मा अंडर-19 कंपटिशन में वैभव ने 332 रन की पारी खेल डाली थी. यानी IPL में 200+ का स्ट्राइक रेट ही नहीं, ये लड़का लंबी पारियां भी खेल सकता है. अलग-अलग फॉर्मेट्स में अंदाज भले एक रहे, लेकिन वैभव बड़ी पारियां खेलते ही रहते हैं. लिस्ट-ए में 190 और T20 में 144 रन उनका हाईएस्ट स्कोर है. यूथ टेस्ट में भी वैभव कमाल कर चुके हैं. IPL में बिकने से पहले ही वैभव ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ अंडर-19 लेवल के यूथ टेस्ट में शतक मार चुके थे.
और फिर दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग में मौका मिलने के बाद तो वैभव आगे ही बढ़ते जा रहे हैं. वैभव के नाम अंडर-19 वर्ल्ड कप भी आ चुका है. साथ ही अब वह राजस्थान रॉयल्स के भविष्य माने जा रहे हैं. लेकिन वैभव को ये सफलता एकाएक नहीं मिली, उनके साथ उनके परिवार ने भी इसके लिए बहुत मेहनत की. बहुत क़ुर्बानियां दीं और अब उन्हें उसका फल मिल रहा है. वैभव के बारे में आपकी क्या राय है, कॉमेंट्स में जरूर बताइएगा. और देखते रहिए खेलकूद.
FAQs
1. Vaibhav Suryavanshi कौन हैं?
Vaibhav Suryavanshi एक उभरते हुए भारतीय क्रिकेटर हैं, जिनकी मेहनत और संघर्ष की कहानी ने उन्हें क्रिकेट में पहचान दिलाई।
2. Vaibhav Suryavanshi की सफलता की कहानी क्या है?
Vaibhav Suryavanshi की कहानी संघर्ष और मेहनत की मिसाल है। परिवार की मुश्किलों के बावजूद उन्होंने क्रिकेट के लिए लगातार मेहनत की और अपनी तकदीर बदल दी।
3. Vaibhav Suryavanshi ने क्रिकेट की शुरुआत कैसे की?
Vaibhav Suryavanshi ने बचपन से ही क्रिकेट खेलना शुरू किया और स्थानीय टूर्नामेंट से अपनी पहचान बनाते हुए बड़े स्तर तक पहुंचे।
4. Vaibhav Suryavanshi क्यों चर्चा में हैं?
Vaibhav Suryavanshi अपनी शानदार बल्लेबाजी और संघर्ष भरी जिंदगी की वजह से क्रिकेट फैंस के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
5. Vaibhav Suryavanshi की कहानी युवाओं के लिए क्यों प्रेरणादायक है?
Vaibhav Suryavanshi की कहानी बताती है कि मेहनत, धैर्य और जुनून से कोई भी अपने सपनों को पूरा कर सकता है।

