पूर्व भारतीय कप्तान जूड फेलिक्स ने Sreejesh को जूनियर पुरुष टीम से सिर्फ 15 महीने में हटाने के फैसले पर हॉकी इंडिया की कड़ी आलोचना की है।
15 महीने में बदलाव से शुरू हुई बहस
भारतीय हॉकी में Sreejesh को लेकर नया विवाद सामने आया है। पूर्व भारतीय कप्तान जूड फेलिक्स ने पीआर श्रीजेश को जूनियर पुरुष टीम की कोचिंग भूमिका से हटाने के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर हॉकी इंडिया ने उन्हें इस भूमिका के लिए चुना था, तो इसका मतलब था कि वह उन्हें योग्य मानती थी। ऐसे में सिर्फ 15 महीने बाद हटाना जल्दबाजी जैसा फैसला दिखता है।
Sreejesh भारतीय हॉकी के सबसे बड़े नामों में शामिल रहे हैं। खिलाड़ी के रूप में उन्होंने भारत को दो ओलंपिक कांस्य पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इसलिए फेलिक्स का मानना है कि उनके अनुभव का इस्तेमाल केवल एक छोटे कोचिंग कार्यकाल तक सीमित नहीं होना चाहिए था।
पूरी स्थिति एक नजर में
| पहलू | जानकारी |
|---|---|
| मुख्य नाम | Sreejesh |
| भूमिका | जूनियर पुरुष टीम से जुड़ी कोचिंग जिम्मेदारी |
| मुद्दा | 15 महीने में हटाने का फैसला |
| आलोचक | जूड फेलिक्स |
| संस्था | हॉकी इंडिया |
| फेलिक्स की राय | फैसला जल्दबाजी वाला |
| महासंघ का पक्ष | विकास टीम कोच की भूमिका ऑफर की गई |
| बड़ा सवाल | भारतीय हॉकी में अनुभव का उपयोग कैसे हो |
जूड फेलिक्स ने क्या सवाल उठाए

जूड फेलिक्स ने कहा कि अनुभव समय के साथ आता है। किसी भी नए कोच को अपनी सोच लागू करने, खिलाड़ियों को समझने और सिस्टम बनाने के लिए समय चाहिए होता है। उनके अनुसार, Sreejesh जैसे बड़े खिलाड़ी को केवल 15 महीने में आंकना सही नहीं है।
फेलिक्स का बड़ा तर्क गोलकीपिंग से जुड़ा था। उनका कहना था कि भारत को ऐसे विशेषज्ञों की जरूरत है, जो युवा गोलकीपरों को लंबे समय तक तैयार कर सकें। Sreejesh ने अपने करियर में विश्व स्तरीय गोलकीपिंग की है। इसलिए उनके तहत गोलकीपरों की मजबूत नई पीढ़ी तैयार की जा सकती थी।
“महान खिलाड़ियों का अनुभव केवल नाम के लिए नहीं, बल्कि सही समय, सही भूमिका और सही योजना के साथ इस्तेमाल होना चाहिए।”
हॉकी इंडिया का पक्ष
हॉकी इंडिया ने अपने पक्ष में कहा कि Sreejesh को विकास टीम कोच की भूमिका ऑफर की गई थी। महासंघ के अनुसार, यह भूमिका लॉस एंजेलिस 2028 और अगले ओलंपिक चक्र की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण थी। इस भूमिका से उन्हें कोच के रूप में अधिक अनुभव और exposure मिल सकता था।
हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, Sreejesh ने यह भूमिका स्वीकार नहीं की। महासंघ ने उनसे फैसले पर दोबारा विचार करने को भी कहा था। इसलिए मामला केवल हटाने का नहीं, बल्कि भूमिका बदलने और उसे स्वीकार न करने से भी जुड़ा है।
विदेशी कोचों पर भी फेलिक्स की टिप्पणी
फेलिक्स ने भारतीय हॉकी में विदेशी कोचों पर बढ़ती निर्भरता पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि विदेशी कोच कई बार भारतीय सिस्टम की गहराई तक नहीं जाते। वे कुछ समय काम करते हैं और फिर आगे बढ़ जाते हैं।
उनके अनुसार, असली जरूरत भारतीय कोचिंग ढांचे को मजबूत करने की है। केवल प्रमाणपत्र या कोर्स काफी नहीं हैं। कोच को खिलाड़ी की व्यक्तिगत स्किल, टीम की संरचना और मैच की जरूरतों को गहराई से समझना होगा।
मुख्य बिंदु
जूड फेलिक्स ने Sreejesh को हटाने के फैसले की आलोचना की।
उनके अनुसार, 15 महीने किसी नए कोच को परखने के लिए पर्याप्त समय नहीं है।
Sreejesh को गोलकीपिंग सिस्टम तैयार करने में इस्तेमाल किया जा सकता था।
हॉकी इंडिया ने कहा कि उन्हें विकास टीम कोच की भूमिका ऑफर की गई थी।
फेलिक्स ने भारतीय हॉकी के coaching structure पर भी सवाल उठाए।
प्रभाव विश्लेषण: असली मुद्दा सिस्टम का है
यह मामला केवल Sreejesh की भूमिका तक सीमित नहीं है। यह भारतीय हॉकी के पूरे coaching system पर सवाल उठाता है। अगर बड़े खिलाड़ियों को कोचिंग में सही दिशा और समय नहीं मिलेगा, तो उनका अनुभव पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो पाएगा।
भारत को grassroots level से लेकर national level तक एक मजबूत coaching pathway चाहिए। युवा खिलाड़ियों को केवल फिटनेस या पोजिशन नहीं, बल्कि complete hockey समझनी होगी। इसके लिए अनुभवी भारतीय नामों को लंबे समय तक सिस्टम में शामिल करना जरूरी है।

Sreejesh को सिर्फ 15 महीने में हटाने का फैसला भारतीय हॉकी में बड़ी बहस बन गया है। जूड फेलिक्स का मानना है कि इतने बड़े खिलाड़ी को अधिक समय और स्पष्ट भूमिका मिलनी चाहिए थी।
हॉकी इंडिया ने अपना पक्ष रखा है, लेकिन सवाल अब भी बना हुआ है। क्या भारतीय हॉकी अपने महान खिलाड़ियों के अनुभव का सही इस्तेमाल कर रही है? अगर इस सवाल का जवाब मजबूत नहीं हुआ, तो कोचिंग सिस्टम पर बहस आगे भी जारी रहेगी।

