कोलकाता/नई दिल्ली(गुकेश): टाटा स्टील चेस इंडिया ब्लिट्ज 2026 के विजेता वेस्ली सो ने शतरंज के भविष्य और FIDE (अंतरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ) द्वारा धड़ाधड़ घोषित किए जा रहे ‘वर्ल्ड टाइटल’ पर कड़ा प्रहार किया है। वेस्ली का मानना है कि इतने सारे विश्व खिताबों की वजह से असली ‘क्लासिकल वर्ल्ड टाइटल’ की वैल्यू कम हो रही है।
वेस्ली सो का विवादित बयान: “FIDE एक राजनीतिक बिजनेस है”
वेस्ली सो ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा कि 2026 के कैलेंडर में इतने ज्यादा विश्व चैंपियन होंगे कि फैंस भ्रमित हो जाएंगे।
- गुकेश का समर्थन: वेस्ली ने साफ किया, “शतरंज में केवल एक ही विश्व चैंपियन होना चाहिए, और फिलहाल वो डी. गुकेश हैं। उन्होंने इसे कड़ी मेहनत से हासिल किया है। बाकी सभी खिताब जैसे रैपिड, ब्लिट्ज या फ्रीस्टाइल केवल सेकेंडरी (दोयम दर्जे के) हैं।”
- राजनीति का आरोप: उन्होंने FIDE को ‘राजनीतिक’ बताते हुए कहा कि वे इसे एक बिजनेस की तरह चला रहे हैं। जो उनके लिए आर्थिक और राजनीतिक रूप से अच्छा होता है, वे वही करते हैं।
2026: एक साल और ‘पांच’ विश्व चैंपियन?
इंटरनेट डेटा के अनुसार, 2026 में शतरंज की दुनिया में खिताबों की बाढ़ आने वाली है:
- FIDE क्लासिकल वर्ल्ड चैंपियन: जिसे डी. गुकेश 2024 में जीते थे और 2026 के अंत में डिफेंड करेंगे।
- FIDE फ्रीस्टाइल चेस वर्ल्ड चैंपियनशिप: यह फरवरी 2026 में जर्मनी में होगी। (हैरानी की बात है कि इसके पिछले चैंपियन होने के बावजूद वेस्ली सो और हिकारु नाकामुरा को इसमें नहीं बुलाया गया है)।
- वर्ल्ड रैपिड चैंपियन: दिसंबर में होने वाला सालाना आयोजन।
- वर्ल्ड ब्लिट्ज चैंपियन: रैपिड के साथ ही आयोजित होता है।
- टोटल चेस वर्ल्ड चैंपियनशिप (Pilot): अक्टूबर 2026 में पहली बार आयोजित होगा, जिसमें क्लासिकल, रैपिड और ब्लिट्ज तीनों का मिश्रण होगा।
फ्रीस्टाइल चेस पर नाराजगी
वेस्ली सो ने विशेष रूप से ‘फ्रीस्टाइल चेस’ (Chess960) को वर्ल्ड चैंपियनशिप का दर्जा देने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इसमें खिलाड़ियों को ‘हैंडपिक’ (अपनी पसंद से चुनना) किया जाता है, जो एक असली वर्ल्ड चैंपियनशिप की गरिमा के खिलाफ है। उनके अनुसार, विश्व चैंपियन बनने के लिए हर खिलाड़ी को क्वालीफायर की प्रक्रिया से गुजरना चाहिए।

शतरंज का बदलता स्वरूप: ‘रेडिकल’ चेस बनाम ‘क्लासिकल’
वेस्ली ने बताया कि अमेरिका में कई लोग मानते हैं कि गुकेश के पास जो ‘क्लासिकल’ खिताब है, वह अब पुराना (Outdated) हो चुका है। लोग अब तेज गेम, ऑनलाइन टूर्नामेंट और NBA जैसे फॉर्मेट चाहते हैं। हालांकि, वेस्ली खुद को ‘ओल्ड-फैशन्ड’ मानते हैं और फिशर, कारपोव और कास्पारोव जैसे महान खिलाड़ियों के 14-गेम वाले क्लासिकल फॉर्मेट को ही असली शतरंज मानते हैं।
वेस्ली सो का यह बयान शतरंज जगत में दो गुट बना सकता है—एक वो जो पारंपरिक शतरंज को बचाना चाहते हैं, और दूसरे वो जो व्यावसायिक सफलता के लिए नए और छोटे फॉर्मेट्स का समर्थन कर रहे हैं। लेकिन भारतीय फैंस के लिए गर्व की बात यह है कि दुनिया का एक दिग्गज खिलाड़ी डी. गुकेश को ही ‘एकमात्र असली विश्व चैंपियन’ मान रहा है।

