लंदन(मार्टिनेली ): फुटबॉल की पिच पर समय की अहमियत ही सब कुछ है। महान योहान क्रुफ (Johan Cruyff) ने कभी कहा था कि “समय कभी आपका दोस्त नहीं होता।” लेकिन आज के आधुनिक फुटबॉल में समय को बर्बाद करना एक ‘डार्क आर्ट’ (नकारात्मक कला) और एक सोची-समझी रणनीति बन चुकी है। आर्सेनल के गैब्रियल मार्टिनेली और लिवरपूल के कोनोर ब्रैडली के बीच हुई हालिया भिड़ंत ने इस मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है।
मार्टिनेली और ब्रैडली विवाद: जब अविश्वास ने लिया हिंसक रूप
आर्सेनल और लिवरपूल के बीच खिताबी जंग के दौरान एक ऐसी घटना हुई जिसने सबको चौंका दिया। मैच के अंतिम क्षणों में जब आर्सेनल जीत के लिए गोल करने को बेताब था, तब लिवरपूल के राइट-बैक कोनोर ब्रैडली चोटिल होकर बाउंड्री लाइन के पास गिर गए।
- मार्टिनेली का गुस्सा: मार्टिनेली को लगा कि ब्रैडली समय बर्बाद करने के लिए नाटक कर रहे हैं। उन्होंने आव देखा न ताव और ब्रैडली को जबरदस्ती धक्का देकर मैदान से बाहर धकेल दिया ताकि खेल शुरू हो सके।
- हकीकत: बाद में पता चला कि ब्रैडली वास्तव में गंभीर रूप से घायल थे और उन्हें बैसाखियों के सहारे स्टेडियम से बाहर जाना पड़ा। मार्टिनेली ने बाद में इसके लिए माफी भी मांगी।

आंकड़ों की जुबानी: क्या फुटबॉल मैच छोटे होते जा रहे हैं?
भले ही रेफरी अब ‘स्टॉपेज टाइम’ (इंजरी टाइम) ज्यादा देने लगे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि गेंद मैदान पर बहुत कम समय के लिए एक्टिव रहती है।
| विवरण | पिछला सीजन (EPL) | वर्तमान सीजन (EPL) |
| मैच की औसत अवधि | 100 मिनट | 100+ मिनट |
| एक्टिव खेल का समय | 56 मिनट 59 सेकंड | 55 मिनट 05 सेकंड |
हैरानी की बात यह है कि इस सीजन में कुछ मैच ऐसे भी रहे (जैसे एस्टन विला बनाम बोर्नमाउथ) जहां प्रभावी खेल केवल 45 मिनट 48 सेकंड का ही हुआ। यानी लगभग आधा समय बेकार के कामों में निकल गया।
समय बर्बाद करने के सबसे बड़े ‘अपराधी’
मैच के दौरान समय की सबसे ज्यादा चोरी निम्नलिखित तरीकों से होती है:
- गोल किक: प्रीमियर लीग में गोल किक के कारण हर मैच में औसतन 7 मिनट 42 सेकंड बर्बाद होते हैं।
- थ्रो-इन: थ्रो-इन लेने के दौरान खिलाड़ी टहलते हैं और निशाना साधने का नाटक करते हैं, जिससे करीब 11 मिनट 20 सेकंड का नुकसान होता है।
- फ्री-किक और सेलिब्रेशन: गोल के बाद लंबे सेलिब्रेशन और फ्री-किक की दीवार बनाने में भी काफी वक्त जाया किया जाता है।
रणनीति या धोखेबाजी?
लिवरपूल के मैनेजर आर्न स्लॉट ने स्वीकार किया कि फुटबॉल में अब खिलाड़ी इतना नाटक करने लगे हैं कि जब कोई वास्तव में चोटिल होता है, तो सामने वाली टीम और फैंस को लगता है कि वह समय काट रहा है।
- विजेता टीम के लिए: यह ‘चालाकी’ है।
- हारने वाली टीम के लिए: यह ‘धोखेबाजी’ या गंदा खेल है।
रेफरी को सख्त कदम उठाने की जरूरत
जब तक रेफरी समय बर्बाद करने वालों को पीला कार्ड दिखाने या सख्त सजा देने में हिचकिचाएंगे, तब तक यह बीमारी फुटबॉल को खाती रहेगी। आज का फुटबॉल ‘जीत के लिए कुछ भी करेगा’ (Win at all costs) की मानसिकता पर चल रहा है, जो खेल की खूबसूरती को खत्म कर रहा है। समय की बर्बादी अब केवल खेल का हिस्सा नहीं, बल्कि एक नकारात्मक हथियार बन गई है।

