
नई दिल्ली/वापी: खेल की दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट ‘विंबलडन’ (Wimbledon) की बात होती है, तो दिमाग में सफेद पोशाक, हरा घास का मैदान और लग्जरी की तस्वीर उभरती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस वैश्विक मंच पर भारत के गुजरात का एक छोटा सा शहर ‘वापी’ पिछले कई सालों से अपनी धाक जमाए हुए है?
जी हां, दुनिया के दिग्गज टेनिस खिलाड़ी जिस तौलिए से अपना पसीना पोंछते हैं, वह ‘मेक इन इंडिया’ की एक शानदार मिसाल है। यह कहानी है गुजरात के वापी में स्थित वेलस्पन (Welspun) कंपनी की, जिसने भारतीय कपड़ा उद्योग की गुणवत्ता और तकनीक को ग्लोबल पहचान दिलाई है।
फेडरर और विंबलडन टॉवल का खास कनेक्शन
टेनिस जगत के दिग्गज रोजर फेडरर विंबलडन के उन खिलाड़ियों में से एक रहे हैं जिन्हें इन तौलियों से खास लगाव था। साल 2006 में जब फेडरर ने अपना चौथा विंबलडन खिताब जीता, तो वह ट्रॉफी के साथ-साथ चैंपियनशिप के पारंपरिक ग्रीन-पर्पल तौलिए को भी अपने साथ ले जाना नहीं भूले।
फेडरर ने तब एक साक्षात्कार में मुस्कुराते हुए कहा था, “मैं इन तौलियों को अपने साथ घर ले जाता रहा हूं। अब तो मेरे पास इनका एक बड़ा कलेक्शन हो चुका है। यह वाकई एक शानदार तोहफा है।”
2009: जब वापी की मिट्टी की खुशबू विंबलडन पहुंची
विंबलडन के इतिहास में साल 2009 एक बड़ा टर्निंग पॉइंट था। लंदन के सेंटर कोर्ट में हजारों दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच जब फेडरर अपना पसीना पोंछ रहे थे, तो वह तौलिया भारत के गुजरात स्थित वापी के कारखाने से बनकर सीधे वहां पहुंचा था।
यह महज एक संयोग नहीं, बल्कि भारतीय इंजीनियरिंग और कारीगरी की जीत थी। 100% कॉटन से बना यह टेरी टॉवल (Terry Towel) आज विंबलडन की पहचान बन चुका है।
कैसे बनता है यह वर्ल्ड क्लास तौलिया?
वापी में वेलस्पन का कारखाना किसी अजूबे से कम नहीं है। यहाँ की उत्पादन प्रक्रिया बेहद आधुनिक है:
कपास का चयन: दुनियाभर से बेहतरीन किस्म की रूई (Cotton) ट्रकों और जहाजों के जरिए एक छत के नीचे आती है।
आधुनिक तकनीक: बड़ी-बड़ी मशीनों में रूई की सफाई से लेकर धागा बनाने तक की प्रक्रिया पूरी तरह ऑटोमैटिक है।
क्वालिटी कंट्रोल: विंबलडन के लिए बनने वाले इन तौलियों के लिए कड़े मानक तय किए जाते हैं, ताकि वे सॉफ्ट, सोखने वाले (Absorbent) और टिकाऊ हों।
ग्लोबल पहचान का प्रतीक
आज वापी में बने ये तौलिए न केवल विंबलडन, बल्कि दुनिया के कई बड़े होटलों और खेल आयोजनों का हिस्सा हैं। यह दिखाता है कि अगर क्वालिटी और तकनीक का सही मेल हो, तो भारत का कपड़ा उद्योग दुनिया के किसी भी कोने में अपनी जगह बना सकता है।
अगली बार जब आप विंबलडन के कोर्ट पर किसी खिलाड़ी को तौलिया इस्तेमाल करते देखें, तो गर्व से कहिएगा— “यह हमारे भारत में बना है!”
